बुधवार, 20 अक्टूबर 2010

शांति की खोज

कभी कभी हम सोचते है की मैक्या हु, कौन हु, मेरा बजूद क्या है
अगर हम बुरा काम करते है तो हमे बुरा सुनना परता है लोगो से बाते सुन्नी परतीहै सभी हमारी बुराई करते है ये स्वभाबिक है।

परन्तु जब हम किसी की मदद करते है उसके सारा गुनाह अपने सर ले लेते है उसे हर दुःख दर्द से बचाना चाहते है तब वे लोग क्यू हमारी निंदा करते है। तब उनको मेरा कार्य क्यू पसंद नहीं होता है।
आखिर ये सब क्या है इतना होने के बाद भी मन उसकी मदद करने को करता है आखिर ये क्या है।
इन कारणों से मन काफी बिचलित हो उधता है और जी चहटा है की कुछ कर विठू

मेरे समझ में ये नहीं आता है इस कारन से मै परेशां हु और शांति के तलाश में हु क्यू की ये साडी बुरी घटनाये मेरे साथ ही क्यू घटीहै
क्या मेरे में कुछ कमी है क्या मेरा मकशाद नेक नहीं है। ये साडी बाते मै सोचता रहता हु पर इसका कोई जबाब नहीं मिल पता है। मेरे समझ में नहीं आता की मै क्या करू।

इस हालत से मुक्ति हेतु अगर कोई रास्ता है तो ब्लॉग पढने परे हर ज्ञानी लोगो से मेरी बिनती है की कोई
अपनी राइ हमइ दे की मै क्या करू। आखिर कैसे मुझे शांति प्राप्ति होगी।

कोई कृपा करे.

मंगलवार, 27 अक्टूबर 2009

गुमराह होते देश के होनहार

आज देश के अधिकांश होनहार छात्र ग़लत रस्ते पे चल दिए है । आज ये देश के होनहार गुमराह हो चुके है । वे पदने और अपने कैरियर बनने के अप्चेचा गन्दी राजनीती का हिस्सा बन्ने में दिल्चाच्स्पी दिखा रहे है। इस का नतीजा है की आज के ये होनहार अपराध करने से भी पीछे नही हट रहे है।
जिसका नमूना डेल्ही या दुसरे बारे शहरों में आसानी से देखा जा सकता है।

शनिवार, 1 नवंबर 2008

देशद्रोही को शकत से शकत सजा देनी चाहिए

आज हमारा देश कुछ स्वार्थी लोगो के कारन काफी समस्या से जूझ रहा है। और हमारे देश के राजनेता इस समस्या पर अपनी राजनीती की रोटी पकने से चुकते नही है। बे अपना वोट बनने के जागर में लगे है।
आक जो कुछ भी महाराष्ट्र में हो रहा है उस सब के पीछे कही न कही हमारे राजनेताओ मतलबी सरकार और कानून के ठेकेथारो का भी हाथ है। आज समय आ चुका है जब देशद्रोहियो के खिलाफ हम सभी को मिलकर मुहीम चलाना चाहिए।
हमारी सरकार देशद्रोही राजठाकरे के खिलाफ आज क्या रही है? यह आज सबसे बरी सबाल सीर्फ़ हम उत्तर भारतीयों के लिए नही बल्कि पुरे भारतीयों के लिए बन चुकी है। अगर ये सरकार, राजनेता और कानून इस तरह से राजनीती करेगी तो मजबूरन हम देशबसियो को कुछ न कुछ काना होगा।
यही सब सोच कर राहुल राज ने मुंबई में असफल बस हईजक करने की कोसिस की थी। लेकिनउस पर बरी तत्पर्दा के साथ पुलिस ने action le और उसका इनकौनातर कर दिया। इस पे उधर के राज्नेतायो के टीइपनी थी हम गोली का जबाब गोली से ही देगे और ये एक्शन बिल्कुल सही थी।
हम उत्तर भारतीय अपने स्टेट में तोफोर कर बिरोध kअर्ने लगे इससे हमे काफी nउख्षाn udhana पर इससे उन्हें कोई असर नही होता है।
हम सबी को मिलकर राज को उसकी औकात बतना cहाहिये। अगर हम महारास्त्र के एक भी गारी अपने स्टेट में नही आने देगे। एक भी फ़िल्म ॐ उत्तर भारत में लॉन्च नही होने देगे। इस सभी से मराह्स्त्र के अर्थ व्यबे४स्थ की वाट लग chayeki। और उसे अपने औकात के पता लग chaga

मंगलवार, 15 जुलाई 2008

थोरी से बचत, मेहनत और प्लानिंग कर महगाई से जीत सकते है.

महगाई आज पुरी दुनिया के सामने एक जटिल समस्या बनकर आई है। हमरा देश भी इस से बुरी तरीके प्रभाबित है। हमें इस समस्या से समय रहते निपटा चाहिए। ये समस्या खाश कर गरीब तबके के लोगो के लिए अभिशाप बनकर सामने आई है। हमारे देश के नेतागन इस समस्या के समाधान करने के बजाये इसे राजनीती मैटर बनाकर इस पर राजनीती करने लगे। क्या इस से ये महगाई समाप्त हो जायेगी? नही कदापि नही!
इस दानव रूपी महगाई को समाप्त करने के लिए हम सभी मेरा मतलब आम जनता, बुदिजीबी लोग, राजनेता और सभी नागरिक गन को मिलकर एकजुट होकर लरना होगा। मेरे सामने कुछ रास्ता है जिसे मै इस ब्लग पर लिख रहा हु ..
१- महगाई का सबसे अहम् कारन मेरे हिसाब से उत्पादन की तुलना में अधिक खपत है। अगर हम अपने खपत में थोरी सी कमी कर ले दो कुछ काबू पा सकते है। दूसरा अगर उतपादन छमता बड़ा ले तो समस्या का कुछ हल हो सकता है।

गुरुवार, 3 जुलाई 2008

हमारी सरकार को महगाई पे लगाम लगानी चाहिए

हमारी सरकार ( केन्द्र एवं राज्य दोनों ) को चाहिए की वो आज की इस बेलगाम महगाई को साथ साथ मिल कर रोक लगानी चाहिए। इस जवलंत समस्या पर कोई राजनीती नही करनी चाहिए। अगर इस देश में गरीबो और माद्यम वर्ग के लोगो को सही तरीके से जीबन यापन करने देना है तो महगाई पर हर हल में रोक लगानी चाहिए। इस महगाई की सबसे बरी मार इन लोगो को झेलनी परती है। और ये जिन्दगी के दौर में पीछे हो जाते है।
एक तरफ़ ये उछाल मारती महगाई और दूसरी तरफ़ बेरोजगारी एवं गरीबी। आप सोच सकते है की ये गरीब किधर जायेगे। इनकी जिन्दगी किस राह पे चलती है ये सोचनी बाते है। इस महगाई के कारन देश के बड़ी आबादी परेशान है। एक तरफ़ आमिर लोग और आमिर होते जा रहे है और गरीब लोग इस महगाई के कारन और गरीब ही नही अपितु मरनासन इस्थिथि में पहुच रहे है।

अत: हमारी सरकार और देश के जिमेबर नागरिको को इस महगाई पे लगाम लगानी चाहिए ताकि देश की गरीब जनता कम से कम दो बकत की रोटी चैन से खा सके। हमारी सरकार से अपील है की पे दलगत भावना से ऊपर उठ कर देशहितमें विचार कर इस समस्या को समाप्त करने की दिशा में आवस्यक कदम उठाये।
इस महगाई के मर को कम करने के लिए हमारे पास कुछ आसन से रस्ते है जैसे हम आपनी आमदनी का कुछ भाग बराबर बचत करे। हम खाद

शनिवार, 10 मई 2008

Our goverment should change his education rule

हमारी सरकार को अपनी शिझानीति मे सुधार करनी चाहिए। इन्हे नए टीचर को उनकी योग्यता के आधार पर रखनी चाहिए थी। अगर टीचर ही शिझित नही रहेगे तो बच्चे कहा से शिझित होगे। अगर बच्चे ही शिझित नही होगे तो इतना सरकारी रूपया खर्च कर के क्या फायदा।
इसलिए सरकार को हमारे उज्जवल भाविषय के लिए अपनी शिझा निति बदलनी चाहिए।

गुरुवार, 11 अक्टूबर 2007

मेरे सपनो का भारत

मेरे सपनो का भारत जहा ना हो गरीबी
मेरा भारत बैषा भारत जहा गरीबी का कोई नाम नही हो । चारो तरफ खुशियाली और हरियाली हो । एषा तब ही हो सकता है जब हमारे देश के राजनेता , बुदिजिवी बर्ग और प्रशानिक तंत्र देश के हित में कुछ सोचे।
गरीबी बस कुछ ही दिनों मे खतम हो जायगे । इसके लिए बस हमे सम्प्रदिक भावना को झोर कर देशहित के नार्जरिया से सोचना होगा । "जैसे देश के आरक्षण पर्नाली " हमारे देश में ये जाती बिशेस के आधार पर दिया जाता है। क्या इस्शे देश प्रगति कर पायेगा ? नही कभी नही उश स्थान पर हम आय सीमा पर आरक्षण लागु करे तो देश के जितने भी गरीब बर्ग के लोग है बे इश्क फएदा सीधा उठायेगे । और देश प्रगति के रास्ते पे दौर परेगा । परंतु अफ्सोश के हमारे देश के जिमेदार लोग आज तक अपना धयान इस ओर नही दे पाए है । बे तो अपने रोटी सकने मे लगे रहते है ।
अगर कोई भी योजना उसके जरूरतमंद लोगो को ध्यान मे रख कर बनाईं जायेगे तो हमारा ये भारत प्रगति के राह पे मे दौरे गा ये कभी भी विकाश के रस्ते मे औरों से पिछे नही रहेगा । ये हर झेत्र मे अपना प्रभुता जमायेगा ।

अमरदीप कुमार सिंह , समस्तीपुर 9835661901